अपनी ₹50 lakh per annum (₹50 LPA) की अच्छी corporate job छोड़कर street food business में गुड़गाँव (Gurgaon) के एक युवक ने कदम रखकर अनोखा उदाहरण सामने रखा है । उन्होंने पाया कि सिर्फ़ passion और मेहनत से भी एक बड़ा brand बनाया जा सकता है।
यह कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो corporate life से बाहर निकलकर entrepreneurship का रास्ता अपनाना चाहते हैं। लोग अक्सर सोचते हैं कि business शुरू करना मुश्किल है, लेकिन सही vision होने पर सब कुछ संभव है।
इसी सोच ने उन्हें मोमो (momo) जैसे साधारण व्यंजन को एक पहचान दिलाई। इस युवक का नाम Saket Saurabh है। उन्होंने 2023 में अपनी secure नौकरी छोड़ी थी ताकि वह अपने खुद के business को पूरा ध्यान दे सकें।
Saket की age करीब 33 years है और उन्होंने अपनी journey शुरुआत में ही शुरू कर दी थी। corporate job में उन्होंने अच्छा salary package पाया था, लेकिन उन्हें लगता था कि उनके अंदर कुछ बड़ा करने की क्षमता है। इसलिए उन्होंने risk उठाया और entrepreneurial path चुना।
₹50 LPA Job छोड़कर Momo Business ने कैसे बना डाला Crorepati? जानिए पूरी कहानी!
High-paying Corporate Job को जब आज के समय में हर युवा सफलता मानता है, वहीं Gurgaon के एक युवक ने बिल्कुल उलटा रास्ता चुना। ₹50 LPA salary वाली secure नौकरी छोड़कर उन्होंने momo business शुरू किया।
शुरुआत में यह फैसला risky लगा, लेकिन नतीजा चौंकाने वाला निकला। सिर्फ 2.5 साल में ₹5 crore की earning ने सबका ध्यान खींच लिया। यह कहानी आज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। Saket ने ग्राउंड-level से शुरुआत की और अपनी छोटी momo stall को खोल दिया।
शुरुआत में उनके पास ज्यादा resources नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने ideas को सही लोगों तक पहुँचाया। शुरुआत में यह सिर्फ एक roadside cart था जो धीरे-धीरे लोगों के बीच प्रसिद्ध हुआ। उनकी मेहनत और dedication ने लोगों को आकर्षित किया। इससे यह साबित होता है कि छोटे से शुरू होने वाला business भी बाद में बड़ा बन सकता है।
Gurgaon के रहने वाले Saket Saurabh पहले एक successful corporate professional थे, जिनकी सालाना income करीब ₹50 lakh per annum (₹50 LPA) थी। लेकिन corporate life की stability के बावजूद उन्होंने entrepreneurship को चुना।
उन्होंने एक छोटे से street food startup के रूप में मोमो बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनका brand “The Momos Mafia” लोगों के बीच popular हो गया। आज यही momo business उन्हें ₹5 crore in 2.5 years की कमाई दिला चुका है।

उनके momo को लोगों ने जल्दी ही पहचान दिया, और “The Momos Mafia” नाम का brand धीरे-धीरे लोग notice करने लगे। यह नाम catchy था और लोगों को instantly attract किया। Brand की पहचान बनने के साथ ही उनकी reach भी बढ़ती गई।
लोग online platforms पर भी इसे खोजने लगे। इससे उनके sales और growth को और भी boost मिला। Saket ने अपने इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक video share किया जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे ₹50 lakh salary छोड़कर मोमो business को चुना।
इस वीडियो में उनके followers और अनजान लोगों ने उनकी कहानी को support किया। यह वीडियो viral भी हुआ और कई लोगों ने इसे like और comment किया। social media ने भी उनके business को एक platform दिया। इससे उन्हें organic visibility भी मिली।
आज The Momos Mafia सिर्फ एक stall नहीं रहा है बल्कि एक सफल franchise business बन चुका है। अब यह brand India के सात राज्यों में फैल चुका है। Franchise model से उन्हें नया expansion मिला और नए investors भी जुड़े।
लोगों ने इस business को बहुत पसंद किया। इससे यह साफ़ दिखता है कि एक local food startup भी national presence हासिल कर सकता है।
Saket ने HT.com के साथ बातचीत में कहा कि उनका goal केवल पैसा कमाना नहीं था, बल्कि एक recognisable dumplings brand बनाना भी था। उन्होंने business के लिए clear vision रखा था। इसी vision ने उन्हें differentiate किया और उन्हें सफल बनाया। वह चाहते थे कि Indian street food को एक proper brand category मिले। इसी वजह से उन्होंने strategy पर ध्यान लगाया।
जब Saket ने अपनी job छोड़ी, तब उनकी salary थी लगभग ₹52 lakh प्रति वर्ष। यह एक comfortable corporate life देती थी, लेकिन उन्हें business world की चुनौती ने अधिक attract किया। उन्होंने job stability के खिलाफ risk उठाया। यह decision उनके लिए सबसे बड़ा turning point साबित हुआ।
इससे यह दिखता है कि sometimes stable income छोड़कर risk लेना भी fruitful हो सकता है। अब उनके business ने सिर्फ revenue ही नहीं बनाया बल्कि total earnings लगभग ₹5 crore in 2.5 years तक पहुंच गई है।
यह figure उस संघर्ष और growth को दर्शाती है। इतना turnover एक startup के लिए बड़ी बात होती है। यह growth उनके business model की ताकत बताती है। धीरे-धीरे यह brand profitability की तरफ बढ़ रहा है।
Saket की journey यह दर्शाती है कि education और corporate experience दोनों ही business में help कर सकते हैं। वह NIFT से graduate थे और पहले co-founded एक startup भी कर चुके थे। इससे उन्हें entrepreneurial skills पहले से ही मिली थीं।
यह अनुभव उनके new business में काम आया। corporate job ने उन्हें discipline और planning सिखाया। इस कहानी से यह सिखने को मिलता है कि perseverance और right strategy के साथ एक छोटा business भी बड़ा बन सकता है।
Momo जैसे simple product को उन्होंने बड़ा बना दिया। उन्होंने कभी compromise नहीं किया। इसी resilience से लोगों की trust भी बनती गई। आज यह story aspiring entrepreneurs के लिए inspiration बन चुकी है।
Conclusion
अ आज The Momos Mafia एक बड़ा brand बन चुका है और आगे expansion की planning भी है। यह story हमें बताती है कि अगर कोई passion के साथ काम करता है और सही attitude रखता है, तो सफलता मिल सकती है। यह growth story Indian startup ecosystem के लिए बड़ी positive news है। इससे कई लोग inspire होंगे कि risk लेने में डरना नहीं चाहिए।
Saket Saurabh की यह कहानी साबित करती है कि success सिर्फ corporate jobs तक सीमित नहीं है। सही vision, consistency और execution के साथ एक साधारण momo business भी करोड़ों का brand बन सकता है।
यह journey उन युवाओं के लिए inspiration है जो job security और passion के बीच फंसे हुए हैं। Gurgaon Man की यह success story Indian startup ecosystem में एक मजबूत उदाहरण बन चुकी है। कभी-कभी बड़ा बनने के लिए safe रास्ता छोड़ना ही सबसे सही decision होता है।
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