Hospitality & Tourism Conclave 2026 में पूर्वी भारत की बढ़ती पर्यटन क्षमता को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। इंडस्ट्री लीडर्स और एक्सपर्ट्स ने ईस्टर्न इंडिया को भारत का अगला टूरिज्म ग्रोथ सेंटर बताया।
इंफ्रास्ट्रक्चर, इन्वेस्टमेंट और पॉलिसी सपोर्ट ने इस क्षेत्र को नई रफ्तार दी है। कॉन्क्लेव में साफ कहा गया कि अब पर्यटन सिर्फ पश्चिम और दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा। ईस्टर्न स्टेट्स तेजी से टूरिज्म मैप पर उभर रहे हैं।
Hospitality & Tourism Conclave 2026 इसका बड़ा उदाहरण है कि पूर्वी भारत अब टूरिज्म सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में ईस्टर्न इंडिया में बढ़ते निवेश और नए प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा हुई।
होटल, ट्रैवल और एविएशन सेक्टर के दिग्गजों ने इसे उभरता हुआ मार्केट बताया। सरकार की सपोर्टिव पॉलिसी ने इस विकास को और मजबूत किया है। कॉन्क्लेव ने निवेशकों का ध्यान पूर्वी राज्यों की ओर खींचा।
Hospitality & Tourism Conclave 2026 में क्यों Eastern India पर बना focus?
Hospitality & Tourism Conclave 2026 ने भारत के पूर्वी हिस्से में तेजी से बढ़ती पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखा। इस कॉन्क्लेव में होटल, ट्रैवल, एविएशन और टूरिज्म सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
कार्यक्रम का मुख्य फोकस ईस्टर्न इंडिया को एक उभरते टूरिज्म हब के रूप में पेश करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि यह क्षेत्र अब सिर्फ सांस्कृतिक नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहा है। आसान कनेक्टिविटी और नई नीतियों ने पर्यटन को बढ़ावा दिया है। इससे रोजगार और निवेश दोनों में वृद्धि देखी जा रही है।
Eastern India पर focus कॉन्क्लेव में बताया गया कि क्योंकि वहाँ नैचुरल ब्यूटी, हेरिटेज और स्पिरिचुअल टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। यहां पहाड़, समुद्र, जंगल और ऐतिहासिक स्थल एक साथ मिलते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डाइवर्सिटी टूरिस्ट्स को लंबे समय तक आकर्षित कर सकती है। सरकार और प्राइवेट सेक्टर मिलकर इस क्षमता को बढ़ा रहे हैं। नए होटल और रिसॉर्ट प्रोजेक्ट्स तेजी से शुरू हो रहे हैं। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिल रहा है।
Hospitality & Tourism Conclave 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को सबसे अहम मुद्दा बताया गया। एयरपोर्ट विस्तार, सड़क नेटवर्क और रेलवे कनेक्टिविटी पर खास जोर दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम से टूरिस्ट फ्लो कई गुना बढ़ सकता है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स भी टूरिज्म को सपोर्ट कर रहे हैं। डिजिटल बुकिंग और स्मार्ट सर्विसेज से अनुभव बेहतर हो रहा है। इससे इंटरनेशनल टूरिस्ट्स का भरोसा भी बढ़ रहा है।
Sustainable Tourism पर भी इस कॉन्क्लेव में विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास जरूरी है। ईको-फ्रेंडली होटल और ग्रीन टूरिज्म मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी अहम माना गया। इससे लोकल लोगों को रोजगार और पहचान मिलती है। लंबे समय में यही मॉडल पर्यटन को स्थायी बनाएगा।
East India की संस्कृति और खानपान को भी टूरिज्म का मजबूत आधार बताया गया। फूड टूरिज्म और कल्चरल फेस्टिवल्स पर चर्चा हुई। लोकल क्यूज़ीन और आर्ट फॉर्म्स टूरिस्ट्स को खास अनुभव देते हैं। कॉन्क्लेव में इन्हें प्रमोट करने की रणनीतियां साझा की गईं।
डिजिटल मार्केटिंग से ग्लोबल ऑडियंस तक पहुंच बनाई जा रही है। इससे क्षेत्र की ब्रांड वैल्यू बढ़ रही है। पूर्वी भारत में एडवेंचर और नेचर टूरिज्म की संभावनाएं भी उजागर की गईं। ट्रेकिंग, वाइल्डलाइफ और वॉटर टूरिज्म जैसे सेक्टर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
युवा यात्रियों के बीच यह ट्रेंड काफी मजबूत है। कॉन्क्लेव में स्टार्टअप्स को भी इनोवेशन के लिए प्रोत्साहित किया गया। टेक्नोलॉजी आधारित टूरिज्म सॉल्यूशंस पर चर्चा हुई। इससे इंडस्ट्री में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है।
Hospitality सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट को लेकर भी खास सत्र रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि ट्रेनिंग और स्किलिंग से सर्विस क्वालिटी बेहतर होगी। होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म एजुकेशन में नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।
इससे युवाओं को लोकल लेवल पर नौकरी के अवसर मिलेंगे। इंडस्ट्री और एजुकेशन सेक्टर के बीच तालमेल बढ़ रहा है। यह कदम भविष्य के लिए बेहद जरूरी माना गया। कॉन्क्लेव में इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज पर भी जोर दिया गया। कई निवेशकों ने पूर्वी भारत को अगला ग्रोथ सेंटर बताया।
होटल चेन और ट्रैवल कंपनियां यहां विस्तार की योजना बना रही हैं। सरकार की सपोर्टिव पॉलिसी निवेश को आकर्षित कर रही है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से बड़े प्रोजेक्ट्स संभव हो रहे हैं। इससे क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हो रही है।
Tourism Industry Leaders ने इसे बड़ा अवसर बताया। सही रणनीति से यह क्षेत्र ग्लोबल मैप पर आ सकता है। इससे देश की टूरिज्म आय में बड़ा योगदान होगा।
कॉन्क्लेव में बताया गया कि पूर्वी भारत अब सिर्फ घरेलू नहीं बल्कि इंटरनेशनल टूरिस्ट्स को भी आकर्षित कर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और प्रमोशन से विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। वीज़ा सुविधा और इंटरनेशनल फ्लाइट्स ने इसे आसान बनाया है।
Hospitality & Tourism Conclave 2026 ने पॉलिसी सपोर्ट को अहम बताया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसे कदमों की सराहना हुई। वक्ताओं ने कहा कि आसान नियम निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं।
टूरिज्म फ्रेंडली पॉलिसी से नई कंपनियां जुड़ रही हैं। इससे प्रतियोगिता के साथ गुणवत्ता भी बढ़ रही है। इंडस्ट्री को इससे लंबे समय का फायदा मिलेगा।
Tourism Industry के लिए Digital Transformation भी इस कॉन्क्लेव का बड़ा विषय रहा। ऑनलाइन बुकिंग, एआई और डेटा एनालिटिक्स से टूरिज्म आसान हो रहा है। होटल्स और ट्रैवल एजेंसियां टेक्नोलॉजी को तेजी से अपना रही हैं।
इससे कस्टमर एक्सपीरियंस बेहतर हुआ है। डिजिटल टूल्स से मार्केटिंग ज्यादा प्रभावी बन रही है। यह बदलाव इंडस्ट्री को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।
Conclusion
Hospitality & Tourism Conclave 2026 ने पूर्वी भारत की टूरिज्म क्षमता को नई पहचान दी। इस मंच ने इंडस्ट्री, सरकार और निवेशकों को एक साथ लाया। चर्चाओं से साफ हुआ कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र तेजी से उभरेगा।
रोजगार, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सस्टेनेबल और डिजिटल टूरिज्म भविष्य की दिशा तय करेगा। पूर्वी भारत अब भारत के टूरिज्म ग्रोथ स्टोरी का अहम हिस्सा बन रहा है।
Hospitality & Tourism Conclave 2026 ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का बड़ा केंद्र बनेगा। सही रणनीति और निवेश के साथ यह क्षेत्र भारत की टूरिज्म ग्रोथ स्टोरी को नई दिशा दे सकता है।
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