Shark Tank India Season 5 केवल business deals और valuation तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शो real-life struggles, mental strength और inspirational journeys को भी सामने लाता है। इस सीजन की जज Kanika Tekriwal ने अपनी ज़िंदगी का एक बेहद दर्दनाक सच साझा किया।
Cancer से जूझते समय उन्हें सिर्फ बीमारी से नहीं, बल्कि लोगों की नकारात्मक सोच से भी लड़ना पड़ा। कुछ relatives ने उनकी माँ से तक कह दिया कि recovery की कोई उम्मीद नहीं है। इसके बावजूद Kanika ने हार नहीं मानी। उनकी कहानी हर उस इंसान को हिम्मत देती है जो मुश्किल हालात में अकेला महसूस करता है।
“Cancer Battle से Shark Tank India Season 5 की Judge तक: Kanika Tekriwal की असली कहानी”
Kanika Tekriwal की ज़िंदगी एक साधारण success story नहीं है, बल्कि यह resilience, self-belief और mental courage का उदाहरण है। जब उन्हें Cancer का पता चला, तब वह अपने career के अहम दौर में थीं। इलाज के दौरान शारीरिक दर्द के साथ मानसिक दबाव भी बहुत ज़्यादा था।
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कुछ relatives ने उनकी माँ से कह दिया कि मदद करने का कोई फायदा नहीं है। यह बात किसी के भी आत्मविश्वास को तोड़ सकती थी। लेकिन यही पल Kanika के लिए turning point बन गया।
Cancer का diagnosis किसी के लिए भी ज़िंदगी बदल देने वाला पल होता है। Kanika Tekriwal के लिए भी यह समय बेहद डरावना था। कम उम्र में गंभीर बीमारी का सामना करना आसान नहीं होता।

Hospital visits, treatment और uncertainty ने उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल दी। हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था। फिर भी उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। सबसे ज़्यादा दर्द तब हुआ जब अपनों से उम्मीद टूट गई। कुछ relatives ने उनकी माँ से कहा कि recovery की कोशिश बेकार है।
ये शब्द सिर्फ सलाह नहीं थे, बल्कि emotional चोट थे। एक माँ के लिए अपनी बेटी के बारे में ऐसा सुनना बेहद मुश्किल होता है। Kanika को जब यह बात पता चली, तो उन्हें गहरा सदमा लगा। लेकिन उन्होंने इसी दर्द को अपनी ताकत बना लिया।
Kanika ने तय किया कि वह अपनी कहानी का अंत खुद लिखेंगी। उन्होंने लोगों की नकारात्मक बातों को खुद पर हावी नहीं होने दिया। Doctors के इलाज और अपनी inner strength पर पूरा भरोसा रखा। यह लड़ाई सिर्फ Cancer के खिलाफ नहीं थी, बल्कि society की सोच के खिलाफ भी थी। हर दिन उन्होंने खुद से एक ही वादा किया – हार नहीं माननी है।
धीरे-धीरे उनकी सेहत में सुधार होने लगा। Recovery के दौरान Kanika ने समझा कि mental positivity कितनी ज़रूरी होती है। अगर इंसान खुद पर भरोसा छोड़ दे, तो हालात और मुश्किल हो जाते हैं। उन्होंने अपनी माँ को भी भावनात्मक रूप से मज़बूत बनाए रखा।
माँ-बेटी का रिश्ता उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। इस दौर ने उनके व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल दिया। यही सीख आगे चलकर उनके business decisions में दिखाई दी।
Cancer से उबरने के बाद Kanika का जीवन को देखने का नज़रिया बदल गया। अब उनके लिए सिर्फ profit नहीं, बल्कि purpose-driven business ज़्यादा मायने रखता था। उन्होंने समझ लिया कि समय सीमित होता है। इसलिए हर फैसला सोच-समझकर लेना ज़रूरी है।
उनके goals पहले से कहीं ज़्यादा clear हो गए। यही maturity उन्हें एक अलग entrepreneur बनाती है। आज जब Kanika Shark Tank India Season 5 की judge हैं, तो उनका अतीत उनके confidence में साफ झलकता है।
वह pitchers को केवल numbers से judge नहीं करतीं। उनके लिए founder का mindset और struggle भी उतना ही अहम होता है। Cancer की लड़ाई ने उन्हें empathy सिखाई है। इसी वजह से उनके फैसलों में human understanding दिखती है। यही बात उन्हें एक unique Shark बनाती है।
Conclusion
Kanika Tekriwal ने यह साबित कर दिया कि लोग क्या कहते हैं, उससे ज़्यादा ज़रूरी यह होता है कि आप खुद पर कितना भरोसा करते हैं। Cancer जैसे मुश्किल दौर में जब अपनों ने भी उम्मीद छोड़ दी, तब उन्होंने खुद को संभाले रखा।
आज Shark Tank India Season 5 में उनकी मौजूदगी सिर्फ एक judge की नहीं, बल्कि एक survivor की पहचान है। उनकी journey बताती है कि असली जीत संघर्ष के बाद ही मिलती है। यह कहानी सिर्फ business की नहीं, ज़िंदगी जीतने की है।
Kanika Tekriwal की कहानी सिर्फ एक celebrity confession नहीं है। यह याद दिलाती है कि हर successful इंसान के पीछे एक अनदेखी लड़ाई होती है। Relatives की बेरुखी भी उन्हें रोक नहीं पाई। उन्होंने pain को power में बदल दिया।
आज वह एक entrepreneur के साथ-साथ inspiration भी हैं। उनकी कहानी हर उस इंसान के लिए है जो हार मानने वाला है।
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