Economic Survey 2025-26 का एक और धमाका! Gig Workers को मिलेगा Minimum Wage, कंपनियों की बढ़ेगी टेंशन?Survey में बताया गया है कि gig workers को अभी formal workers जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं।
उन्हें न तो fixed salary मिलती है और न ही social security benefits। बीमार पड़ने या काम कम होने पर उनकी income सीधे प्रभावित होती है। minimum wage लागू होने से यह जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है। इससे workers का भरोसा system पर बढ़ेगा। साथ ही gig jobs को भी ज्यादा सम्मान मिलेगा।
Minimum Wage for Gig Workers क्या है ? Delivery Boy से Cab Driver तक क्या बनेगा नया खेल!
Economic Survey 2025-26 में पहली बार gig workers को लेकर बड़ी और अहम बात कही गई है। सर्वे में सुझाव दिया गया है कि gig economy में काम करने वाले लोगों के लिए minimum wage तय की जानी चाहिए। सरकार का मानना है कि gig workers देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत हिस्सा बन चुके हैं। डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे लोग दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
इसके बावजूद इनकी income स्थिर नहीं रहती है। इसलिए minimum wage का प्रस्ताव एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Gig workers लंबे समय से minimum wage की मांग कर रहे हैं। कई बार protests और strikes भी देखने को मिले हैं।
workers का कहना है कि rising inflation में उनकी income टिक नहीं पा रही। fuel prices और living cost लगातार बढ़ रही है। ऐसे में minimum wage उनकी basic जरूरतें पूरी करने में मदद कर सकती है। Survey ने उनकी आवाज को support दिया है।
Gig Economy तेजी से बढ़ रही है। लाखों युवा traditional jobs छोड़कर gig platforms से जुड़ रहे हैं। इसमें flexibility तो मिलती है, लेकिन income security नहीं होती। कई बार काम ज्यादा होता है, लेकिन भुगतान कम मिलता है। इसी असमानता को खत्म करने के लिए minimum wage का सुझाव दिया गया है। इससे gig workers को एक basic income protection मिल सकेगी।

Gig Platforms का role बहुत बड़ा है। Ola, Uber, Swiggy, Zomato जैसी कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार दे रही हैं। लेकिन survey के मुताबिक, इन कंपनियों की responsibility भी बनती है। minimum wage तय होने से platforms को payment structure बदलना पड़ सकता है। इससे fair pay सुनिश्चित की जा सकेगी।
Minimum wage के साथ Insurance और pension जैसे benefits जोड़ने की बात कही गई है। इससे gig workers को long-term security मिल सकती है। अभी अधिकतर workers future savings नहीं कर पाते। policy support मिलने से उनकी financial planning बेहतर हो सकती है। यह कदम inclusive growth की दिशा में माना जा रहा है।
Economic Survey 2025-26 में social security को भी अहम बताया गया है। सरकार और कंपनियों के बीच coordination जरूरी बताया गया है। Survey में minimum wage के साथ-साथ काम के घंटे पर भी ध्यान देने की बात कही गई है। कई gig workers 10 से 12 घंटे तक काम करते हैं। इसके बावजूद उनकी monthly earning बहुत सीमित रहती है।
minimum wage लागू होने से per-hour earning तय की जा सकती है। इससे overworking की समस्या भी कम हो सकती है। workers को work-life balance मिलने की उम्मीद है।
Gig Economy का nature flexible है। demand और supply हर दिन बदलती रहती है। ऐसे में uniform wage तय करना चुनौती भरा हो सकता है। लेकिन survey कहता है कि regional और sector-wise wage तय की जा सकती है।
इससे practical solution निकल सकता है। Experts का मानना है कि minimum wage लागू करना आसान नहीं होगा।Economic Survey यह भी साफ करता है कि यह अभी एक suggestion है। इसे तुरंत कानून बनाने की बात नहीं कही गई है।
पहले stakeholders से बातचीत की जाएगी। gig platforms, workers और policy makers के बीच चर्चा जरूरी होगी। इसके बाद ही final decision लिया जाएगा। लेकिन survey में इसका mention होना अपने आप में बड़ा संकेत है।
Conclusion
Economic Survey में यह भी कहा गया है कि gig economy future of work है। आने वाले सालों में इसका size और बढ़ेगा। अगर अभी से rules नहीं बनाए गए, तो inequality बढ़ सकती है।
minimum wage जैसे कदम system को balanced बना सकते हैं। इससे workers और platforms दोनों को clarity मिलेगी। long-term में economy को भी फायदा होगा। इस सुझाव को लेकर mixed reactions देखने को मिल रही हैं। workers इसे positive कदम मान रहे हैं।
वहीं कुछ platforms को cost बढ़ने की चिंता है। experts का कहना है कि fair wage से productivity भी बढ़ेगी। satisfied workers बेहतर service देंगे। इससे overall ecosystem मजबूत हो सकता है।
Economic Survey 2025-26 का यह सुझाव gig workers के लिए उम्मीद की किरण है। minimum wage लागू होने से उनकी जिंदगी में stability आ सकती है। हालांकि रास्ता आसान नहीं होगा। policy, platforms और workers को मिलकर समाधान निकालना होगा।
अगर यह सही तरीके से लागू हुआ, तो gig economy को नया रूप मिल सकता है। यह कदम भारत की inclusive growth strategy को मजबूत करेगा।
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