Pre-Money VS Post-Money Meaning, Difference & Formula

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Shark Tank India Lesson Pre-Money vs. Post-Money के बारे में कई बार हमनें देखा की शार्क और पिचर वैल्यूएशन के स्तर और आकड़ों में परइ मनी और पोस्ट मनी के बारे में स्पष्ट करते रहते हैं । कार्यक्रम में सुनने में अब तो काफी आम लगता है, लेकिन इस विषय का कंपनी के निर्णय में करोड़ों या उससे भी अधिक असर हो सकता है। आज हम इस विषय को सरल जनता के लिए आसान भाषा में प्रस्तुति करेंगे।

Pre-Money VS Post-Money Meaning, Difference & Formula
Pre-Money VS Post-Money Meaning, Difference & Formula

Pre-Money vs Post-Money meaning, Difference में सबसे प्राथमिक कारण है समय। इन शब्द में ही इसका अर्थ है। Pre-Money मनी मिलने के पहले होता है और Post-Money मनी मिलने के बाद के व्यवहार को कहते हैं। एक बार आप इसका अर्थ समझ लेंगे तो इसकी उपयोगिता आपको अपने आप सब सीखा लेगी। कांसेप्ट को आसान भाषा में सीख लेने के बाद उस विषय पर अंग्रेजी में समझने भी सरलता रहती है।

Pre-money Valuation Meaning

Pre-Money vs Post-Money meaning निवेश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण विषय हैं। किसी भी बाह्य निवेश या लेटेस्ट राउंड ऑफ़ फंडिंग के पहले को कंपनी की किम्मत का अनुमान लगाया जाता है। हालांकि यह दोनों ही सामान्य रूप से बिज़नेस की किम्मत जांचकर संघठन के उच्च स्तरीय निर्णय में मदद देते हैं।

सप्ताल फण्ड जो बिज़नेस इन्वेस्टमेंट का भाग बनता है, उसमें कोई नया विस्तार, बदलाव या कटौती करते वक़्त इस गणित ख़ास तौर से किये जाते हैं। बैलेंस शीट के आकड़ो को सच्ची किम्मत से प्रस्तुत करने भी वैल्यूएशन किये जाते हैं, लेकिन ऐसे में Pre-Money vs. Post-Money Meaning and Difference के विषय में उलझन नहीं होती है।

Pre-Money VS Post-Money Meaning, Difference & Formula
Pre-Money VS Post-Money Meaning, Difference & Formula

सबसे पहले जब धंदा शुरू होता है, तब वह सिर्फ अपने पैसों के निवेश से होता है। लेकिन पहली बार निवेश लेते वक़्त बहुत से अनुमान और गणित करने के बाद सभी आकड़ो को भविष्यात्मक आय और वैल्यू के लिए तोलमोल किया जाता ह। बिज़नेस मॉडल, मेथड ऑफ़ बुक्स ऑफ़ एकाउंट्स और बैलेंसशीट वलुआटीओ को परखकर किम्मत जांचते हैं।

जब बिज़नेस आईडिया पर वैल्यू बनायी जाती है, तब इन सब बात पर ख़ासकर ध्यान देना पड़ता है। छोटे मोटे थ्योरी की मदद से प्रोजेक्शन द्वारा किम्मत को बहुत बढ़ाकर प्रस्तुत किया जा सकता है। उन सभी थ्योरी के हिसाब से उसके असली प्रभाव को परखकर निवेश के निर्णय लेने चाहिए।

जब पहला निवेश किया जाता है, उस वक़्त आय के गुणाकर के फार्मूला, एसेट की किम्मत के फार्मूला से अनुमानित आकड़ो से पोस्ट मनी वैल्यूएशन को प्राप्त करके प्री मनी वैल्यूएशन का गणित किया जाता है। पोस्ट मनी के वक़्त भी निवेशगण को प्री मनी के आकड़ों के हिसाब से निर्णय लेने गणित करने पड़ते हैं । लेकिन जब ऐसा किया जाता है, हमारे पास पोस्ट मनी का सच्चा आकड़े के बारे में सच्ची जानकरी पता होती है।

Pre-money Formula / Calculation

प्रीमनी वैल्यूएशन (Pre-money valuation) = पोस्टमनी वैल्यूएशन (Post-money valuation) – इन्वेस्टमेंट अमाउंट (Investment amount)

Post-money Valuation Meaning

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Post-money Valuation Meaning है कि बाह्य इन्वेस्टमेंट प्राप्त हो चूका है और वलयतिओं में बिज़नेस के मालिक और निवेशजनक के आकड़ो को मिलाकर वैल्यूएशन का आकड़ा बताया गया है। यह निवेश की रककम को जोड़ लेने के बाद जो बिज़नेस वैल्यू को दर्शाता है।

Pre-Money VS Post-Money Meaning, Difference & Formula
Pre-Money VS Post-Money Meaning, Difference & Formula

फाउंडर इक्विटी और अन्य निवेश जैसे की एंजेल इन्वेस्टमेंट, राउंड फंडिंग के सारे मूल्य बैलेंस शीट में जोड़कर कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन बनता है। पोस्ट मनी वैल्यूएशन में आकड़ो के अनुमान पता करना सरल हो जाता है। इसका गणित मार्किट के साथ तालमेल खाते हुए कुछ सही आकड़ो को प्रदर्शित करते हैं। बाह्य इन्वेस्टमेंट को जोड़ने से पहले जिन मूल्यांकनों की गणना की जाती है, उन्हें प्री-मनी वैल्यूएशन कहा जाता है।

Post-money Formula / Calculation

पोस्टमनी वैल्यूएशन (Post-money valuation) = इन्वेस्टमेंट अमाउंट (Investment amount) ÷ इक्विटी प्रतिशत जो निवेशजनक को प्राप्त हो (Equity Percent that Investor receives)

प्रीमनी वैल्यूएशन (Pre-money valuation) + फंड रैस्ड (Funds Raised) = पोस्टमनी वैल्यूएशन (Post-money valuation)

Shark Tank India Lesson Pre-Money vs Post-Money Difference Understanding

  • Pre-Money Valuation अक्सर नकद फाउंडर इक्विटी को दर्शाता है। विस्तार में यह हो सकता है कि फाउंडर के नजदीकी लोगों का निवेश मिलाकर प्री मनी वैल्यूएशन बना हो। एक्सटर्नल फंडिंग या बाह्य फंडिंग राउंड को कंपनी के प्री-मनी वैल्यूएशन में शरीक नहीं करते हैं।
  • Post-Money Valuation इंवेस्टमेंट्स कि रक्क्म को जोड़कर मार्किट में बिज़नेस किम्मत को प्रदर्शित करता है। एक पोस्ट मोइनी वैल्यूएशन में निवेश पाने के लिए सम्भवनाएँ और विश्वास बढ़ जाता है।
  • जब पहला इन्वेस्टमेंट होता है तब बिज़नेस में चल रहे बुक्स ऑफ़ एकाउंट्स, वैल्यूएशन , बिज़नेस मॉडल, रिस्क सब परखना पड़ता है। उसके बाद पहले फंडिंग के लिए यह सब ऑडिट होकर एक पारदर्शता को बढ़ा देता है। जब बिज़नेस इन्वेस्टमेंट होता है, तो इंटरप्रेन्योर और इन्वेस्टर कि और से काफी जाँच होती हैं। पोस्ट-मनी वैल्यूएशन के वक़्त प्राथमिक परीक्षण कि आवश्यकता नहीं होती। हालांकि इन्वेस्टमेंट सभी निरिक्षण को कभी अनदेखा नहीं कर सकते हैं।
  • पोस्ट-मनी वैल्यूएशन, प्री-मनी वैल्यूएशन और किसी भी नई इक्विटी जो बाहरी निवेशकों से प्राप्तकी राशि हो उसे जोड़कर मिलता है।

Conclusion

Shark Tank India Pre-money and Post-money Valuation जैसे विषय से आपको बिज़नेस की भाषा सीखने मिले, इसलिए हम हिन्दी में इसपर लिखते रहते हैं। Shark Tank India के ये लेसंस से आपको फायदा मिलता है या नहीं, ये जरूर बतायें।

Shark Tank India Pre-money and Post- money समान कोई और विषय पर आप हमसे कोई लेसन पर पोस्ट चाहते हैं, तो बेजीजक कमेंट करें। आपकी प्रतिक्रियाओं को एक साथ रिव्यु करके हम आगे काम जरूर करेंगे।

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